बर्फीली रात का देसी जुनून
शिमला की बर्फीली रात में कबीर की तबीयत खराब है और नागराज सिंह उसे शराब पिलाकर अपनी गर्माहट देने का बहाना बनाते हैं। जो शुरू में ठंड से बचाने की कोशिश लगती है, वह जल्द ही एक जंगली देसी हवस में बदल जाती है। क्या कबीर इस मर्दाना दबाव का सामना कर पाएगा?
शिमला की ठंडी हवाएं खिड़की के शीशों से टकराकर एक अजीब सी सर्द आवाज़ कर रही थीं। कबीर, जो बीस साल का एक दुबला-पतला गोरा और कोमल लड़का था, अपने बिस्तर पर बुरी तरह कांप रहा था। उसके गुलाबी होठों पर सियाही फैली हुई थी और वो बार-बार कंबल को अपने ऊपर और तंग करता जा रहा था। दो दिन से लगातार बर्फबारी हो रही थी और पूरी टीम वहां फंसी हुई थी। कबीर को काफी ठंड लग गई थी, दवाइयों का कोई असर नहीं हो रहा था।
उसके साथ वाले बिस्तर पर कंपनी के HR सर, नागराज सिंह बैठे थे। सैंतीस साल के ये देसी मर्द, जो तीन बेटों वाले शादीशुदा मर्द थे, अपनी पूरी जवानी और ताकत अभी भी कायम रखे हुए थे। उनका बदन भरा हुआ और हरियाली से भरपूर था। नागराज ने कबीर की तकलीफ देखी और अपने बैग से एक बोतल निकाली। वो एक शीशी में शराब भरकर कबीर के हाथ में थमाते हुए बोले, इसे पी लो यार, इससे ठंड भाग जाएगी और शरीर में आग लग जाएगी।
कबीर ने हिचकिचाते हुए एक घूँट पी लिया। शराब की गर्माहट उसके गले से होती हुई पेट में उतरी और उसे तुरंत कुछ राहत मिली। नागराज ने भी एक लंबा घूँट लगाया और शीशी किनारे रख दी। शराब का नशा और कमरे की ठंड में नागराज के बदन में एक अलग ही गर्मी पैदा होने लगी। उनकी आँखें लाल होने लगी थीं और उनमें एक भूख दिखाई दे रही थी। वो धीरे-धीरे अपनी शर्ट और पैंट उतारकर सिर्फ अंतर्वस्त्र में आ गए। उनकी भरी हुई छाती और पैरों पर घने बाल उन्हें एक कसे हुए देसी मर्द जैसा रूप दे रहे थे।
नागराज ने देखा कि कबीर अभी भी कांप रहा था। वो उठकर कबीर के बिस्तर पर चढ़ गए और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उनका मजबूत और गर्म बदन कबीर की ठंडी त्वचा से टकराया। नागराज ने कंबल दोनों के ऊपर ओढ़ लिया और कबीर को सहलाने लगे। अब ठंड नहीं लगेगी, नागराज ने कराहते हुए कहा। उनके हाथ कबीर की पतली कमर पर घूमने लगे और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ गए। कबीर की छोटी और गोल गांड़ नागराज के हाथ की मुट्ठी में समा गई।
नागराज ने उस नाजुक गांड़ पर अपना हाथ घुमाना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियां कबीर की गांड़ के छेद के इर्द-गिर्द मसल रही थीं। शराब और उस गर्म छुवन के नशे में कबीर का सर घूम गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और नागराज की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए। नागराज ने भी उसके गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया। दोनों की सांसें तेज हो गई थीं।
नागराज का लंड अब उनकी अंतर्वस्त्र में कैद नहीं रह सकता था। वो इतना मोटा और लंबा था कि उसने कपड़े को फाड़कर बाहर आने की कोशिश करनी शुरू कर दी। नागराज ने जल्दी से अपनी अंतर्वस्त्र नीचे खिसका दी और उनका लहराता हुआ हरियाली भरा लंड बाहर आ गया। वो लोहे की तरह सख्त और गर्म था। नागराज ने कबीर का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखवाया। कबीर ने उस मोटी नस को महसूस किया और उसकी आँखों में डर और चमक दोनों थे।
इसे चूस लो मेरे राजा, नागराज ने कहा, अपने लंड पर थोड़ी शराब डालते हुए। कबीर झुक गया और उसने नागराज के लंड को अपने मुँह में ले लिया। शराब की कड़वाहट और नागराज की मर्दानगी के स्वाद से उसका मुँह भर गया। वो धीरे-धीरे उसे चूसने लगा। नागराज ने अपने हाथों से कबीर के बालों को पकड़ लिया और उसके सर को अपने लंड पर दबाने लगे। हाँ ऐसे ही चूस साले कुत्ते की तरह।
फिर नागराज ने कबीर को उल्टा कर दिया। उन्होंने कबीर के सारे कपड़े उतार दिए और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। कबीर का दुबला शरीर नागराज के सामने बिल्कुल नाजुक लग रहा था। नागराज ने अपनी एक उंगली कबीर की गांड़ में डाल दी। कबीर ने एक तीखी सांस ली और सिहर उठा। आह धीरे। नागराज ने उसे चुप कराते हुए कहा, चुप रह यार अब मजा आने वाला है।
नागराज ने अपना लंड कबीर की गांड़ के छेद पर रखा। वो धीरे से धक्का देने लगे। कबीर की गांड़ बहुत तंग थी। नागराज का मोटा लिंग का अग्रभाग अंदर जाने के लिए जूझ रहा था। साली मादरचोद इतनी तंग है तो फाड़ दूंगा, नागराज ने गुस्से से कहा और एक जोरदार धक्का मारा। उनका आधा लंड कबीर की गांड़ में घुस गया। कबीर दर्द से चीख पड़ा।
छोड़ ना बहुत दर्द हो रहा, कबीर ने रोना शुरू कर दिया। पर नागराज ने उसे जाने नहीं दिया। उन्होंने उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया और लगातार धक्के मारने शुरू कर दिए। ले यार अपने बाप का लंड तेरी गांड़ को वीर्य से भर दूंगा। नागराज की यौन शक्ति देखने लायक थी। वो एक देसी मर्द की तरह पूरी ताकत और हवस के साथ गांड़ चोद रहे थे। उनकी रफ्तार बढ़ती जा रही थी।
कबीर अब दर्द भूलकर मजे में आ गया था। वो एक पके हुए गांड़ू की तरह नागराज का साथ दे रहा था। वो पीछे की ओर होकर नागराज के हर धक्के का जवाब दे रहा था। हाँ और जोर से चोद मुझे फाड़ दे मेरी गांड़। कबीर भी अब गालियां देने लगा था। नागराज के लंड की नसें फूल रही थीं और वो अपनी सीमा पर थे।
ले बहनचोद ले मेरा वीर्य, नागराज ने जोर से चिल्लाते हुए पहला वीर्य कबीर की गांड़ में उतार दिया। गर्म वीर्य की धार कबीर के अंदर गिरी। पर नागराज रुके नहीं। वो अभी भी उसी रफ्तार से धक्के मार रहे थे। उनका लंड अभी भी खड़ा था। उन्होंने दूसरी बार भी अपना पानी कबीर की गांड़ में छोड़ दिया। कबीर तड़प उठा और उसका भी पानी नागराज के पेट पर गिर गया।
नागराज ने उसे फिर से पलट दिया और तीसरी बार उसकी गांड़ में अपना लंड डाल दिया। इस बार वो और भी जोश में थे। तेरी मां की चूत क्या गांड़ है तेरी रे। नागराज देसी गालियां देते हुए पूरी ताकत से उसे चोद रहे थे। कबीर की गांड़ अब उनके वीर्य से लबालब भर चुकी थी। आखिरकार नागराज ने तीसरी बार भी अपना माल कबीर की गांड़ में छोड़ दिया और दोनों थककर एक-दूसरे से चिपक गए। कमरे में सिर्फ भारी सांसों की आवाज़ें और वीर्य की गंध फैल रही थीं।
उसके बाद नागराज और कबीर कंबल के अंदर एक साथ नंगे होकर सो गए। दोनों यह ट्रिप कभी नहीं भूलने वाले हैं।