गिटार के साथ गांड़ भी बजाई

Horny Student with tall dick exposed
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गिटार के साथ गांड़ भी बजाई

गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होते ही शुभ ने गिटार सीखने का निश्चय किया। उसके गगन सर ने छोटे से कमरे में अपना गिटार का कक्षा चलाया था। शुभ की मौसी वीना गगन सर की पुरानी दोस्त थी और उसी के कहने पर गगन सर ने शुभ को बिना फीस के पढ़ाने की बात मान ली थी। पहले दिन जब शुभ कक्षा में पहुँचा तो गगन सर एक पुरानी कुर्सी पर बैठे थे। उनकी उम्र उनतीस साल थी, देसी मर्द जैसा भरा हुआ जिस्म, चौड़ी छाती और आँखों में एक अजीब सी गहराई। शुभ ने पहली नज़र में ही महसूस किया कि यह आदमी कुछ अलग है।

गगन सर की पैंट में एक भारी सी ढलान थी जो बार-बार शुभ की नज़रों में आ रही थी। शुभ ने उस उभार को देखा, फिर नज़र हटाई, फिर दोबारा देखा। उसके सीने में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई। गिटार सीखने में शुभ जल्दी ही निपुण हो गया। उसकी उंगलियाँ तारों पर ऐसे दौड़ती थीं जैसे बरसों से बजा रहा हो। गगन सर के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती थी जब शुभ कोई नया धुन बजा देता। “तू मेरा पसंदीदा छात्र है शुभ,” गगन सर ने एक दिन कहा और उनका हाथ शुभ के कंधे पर रखा गया। शुभ के शरीर में एक झनझनाहट दौड़ गई।

वह उस हाथ की गर्माहट को महसूस करता रहा और उसके अंदर कुछ ऐसा हिलने लगा जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। जब कक्षा में कोई लड़की नहीं आती थी तो गगन सर बेझिझक हो जाते थे। एक दिन उन्हें लगा कि उनके लिंग में खुजली हो रही है तो उन्होंने लड़कों के सामने ही अपना मोटा लिंग पैंट के ऊपर से हलके से रगड़ा। शुभ की नज़रें उस उभार पर टिक गईं। उसके मुँह में लार आ गई। उसने नज़रें फेरीं पर उसका दिल और गांड़ का छेद दोनों एक साथ कुछ महसूस कर रहे थे।

वह उस रात बिस्तर पर लेटा रहा और उसका लिंग खड़ा हो गया। उसने अपनी चड्डी नीचे की और गगन सर की भारी छाती और मोटे लिंग की कल्पना में अपना लिंग हिलाया। उसे अपनी गांड़ के छेद में एक खुजली महसूस हुई जो बढ़ती गई। कुछ दिन बाद शुभ कक्षा गया तब वह भूल गया कि बुधवार की कक्षा नहीं होती। पर जब शुभ उस दिन पहली बार सर के घर पर अंदर चला गया तो गगन अपने घर पर अकेला था। गगन अभी बस एक तौलिये में था। उसकी मर्दाना छाती पूरी नंगी थी, उसके मैन बूब्स भी भरे हुए थे और उसकी छाती के बालों की एक लाइन सीधे उसके लिंग की तरफ नीचे आ रही थी।

गगन अपनी मोज में आधा नग्न होकर सिगरेट पी रहा था। तभी शुभ उसके कमरे में आ गया और अपने सर को ऐसा देखकर शरमा गया और डर भी गया। उसने पीछे मुड़कर जाने की कोशिश की पर गगन ने कोई विरोध नहीं किया। “अरे शुभ, बुधवार को तो कक्षा नहीं होती भाई,” गगन ने सिगरेट का धुआँ छोड़ते हुए कहा। “पर अब आ गया है तो आ जा, बैठ यहाँ।” गगन ने प्यार से उसको अपने पास बुलाया। शुभ हिचकिचाता हुआ आगे बढ़ा। उसकी आँखें गगन की नंगी छाती पर टिकी थीं, फिर तौलिये के नीचे के उभार पर, फिर जल्दी से नीचे फर्श की तरफ।

गगन ने उसे पास बिठाया और उससे इतने दिन नहीं आने वाली बात पूछी। “कहाँ था इतने दिन? गिटार का अभ्यास कर रहा था या लंड फड़ रहा था?” गगन ने हँसते हुए पूछा। शुभ का चेहरा लाल हो गया। फिर गगन उठा और उसको पानी दिया। पर अभी भी गगन बस तौलिये में ही था। शुभ की आँखें बार-बार उस तौलिये के नीचे के उभार की तरफ भागती थीं। पानी पीकर शुभ उठा और जाने लगा तो गगन ने उसे रोका। “थोड़ी देर से जाना। अगर कोई बात है तो बता दो। घर पर सर के पास हूँ ना।” शुभ ने कहा कि घर पर कोई नहीं है। गगन ने कहा, “फिर कोई समस्या नहीं है, बैठ थोड़ी और बात करते हैं।”

फिर गगन ने शुभ से थोड़ी वयस्क वाली बात शुरू की। शुरू में उसकी शर्म आ रही थी। पर जब गगन ने उसे आरामदायक महसूस कराया तो शुभ ने गगन से सीधी पूछ लिया, “सर, आपने कब से सेक्स नहीं किया?” गगन ने एक लंबा कश लगाया और बताया, “अभी आठ दिन ही पहले एक रंडी को चोदा है।” यह सुनकर शुभ का लिंग भी खड़ा होने लगा जो उसकी हाफ पैंट से दिख रहा था। गगन की नज़रें उस उभार पर पड़ीं। एक पल को दोनों की आँखें मिलीं। फिर गगन ने धीरे से अपना हाथ शुभ के लिंग पर रख दिया और उसको चूम लिया।

शुभ के लिए यह सब एकदम सपना सा था। गगन के होंठ उसके होंठों पर थे और उसका हाथ शुभ के लिंग को हाफ पैंट के ऊपर से दबा रहा था। शुभ ने भी गगन का साथ देना शुरू कर दिया। उसके हाथ गगन की भारी छाती पर फिरने लगे। गगन ने शुभ की हाफ पैंट उतार दी और उसकी चड्डी भी। शुभ पूरा नग्न हो गया। गगन ने शुभ की मस्त चुसाई की और पहले शुभ ने गगन सर के साथ मिलकर 69 ब्लोजाब का मजा लिया। शुभ का शरीर एक झटके से तन गया। उसकी उँगलियाँ गगन के बालों में फँस गईं। फिर गगन ने अपना तौलिया निकाला और अपना देसी लिंग बाहर निकाला। वह लिंग शुभ के लिंग से दोगुना बड़ा और मोटा था।

गगन ने पहले उस पर तेल मालिश की और फिर तकिये के अंदर से एक कंडोम निकालकर पहन लिया। गगन ने शुभ की गांड़ के छेद को खोला। पहले उसने उँगली से तेल लगाया, फिर दो उँगलियाँ अंदर डालीं। शुभ का शरीर एकदम से कस गया। “आह सर, दर्द हो रहा है,” शुभ ने कहा। गगन ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा, “अभी दर्द हो रहा है तो डर मत। रुक, फिर मजा भी दूंगा।” फिर गगन ने अपना मोटा लिंग शुभ की गांड़ के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला। शुभ की आँखों में आँसू आ गए। उसकी गांड़ फट गई और वह रोने लगा। “माँ चोद दी सर, फट गई गांड़,” शुभ ने सिसकते हुए कहा। गगन ने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा और कहा, “चुप कर गांडू, अभी तो शुरू किया है। मजा ले मेरे देसी मर्द वाले लिंग का।”

फिर गगन ने पूरी शाम जी भर के समलैंगिक यौन संबंध का आनंद लिया। शुभ ने भी अपने गगन सर के देसी मर्द वाले लिंग से खुशी-खुशी चुदवाई कराई, हर गे सेक्स पोजिशन का उपयोग करके। फिर गगन ने शुभ को घुटनों के बल झुकाया और पीछे से अपना लिंग अंदर ठेल दिया। शुभ ने अपनी गांड़ उठाई और गगन के ठक्कों की लय अपनाने लगा। गगन की छाती शुभ की पीठ पर लग रही थी और उसका मोटा लिंग शुभ की गांड़ के अंदर फिर रहा था। शुभ ने गगन के बालों को पकड़ा और अपनी गांड़ पीछे धकेली। गगन ने शुभ के कान में कहा, “ले गांडू, ले मेरा देसी लिंग अपनी गांड़ में। भर गई क्या?” शुभ ने सिर हिलाया और बोला, “और दे सर, और गहरा दे। फाड़ दे मेरी गांड़।”

गगन ने जोर का झटका मारा और शुभ चीख उठा। फिर दोनों ने आमने-सामने लेटकर शुभ की टाँगें गगन के कंधों पर रखीं और गगन ने आगे की तरफ झटके लगाए। शुभ का लिंग खड़ा था और हवा में हिल रहा था। गगन ने उसे पकड़ा और हिलाते हुए चोदता रहा। शुभ की आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे और उसका शरीर गगन के हर झटके के साथ हिल रहा था। शुभ की कुंवारी गांड़ का भरपूर मनोरंजन लिया और दिया भी। फिर कंडोम निकालकर शुभ की गांड़ में अपना मर्दाना रस छोड़ दिया और बाकी उससे चाट कर साफ़ कराया और खुद भी शुभ की मूठ मारी और उसका वीर्य भी खाया। अब जब भी दोनों का मन करता है दोनों गे सेक्स एंजॉय कर लेते हैं।

अंत में गगन ने शुभ की गांड़ में अपना सारा वीर्य उंडेल दिया और शुभ ने भी गगन के हाथ में अपना वीर्य छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर लेटे रहे, हाँफते हुए, पसीने से तर, और गगन ने शुभ के माथे पर एक किस किया। शुभ 23 साल का है और गे सेक्स में रुचि रखता है और गगन सर 29 साल के देशी मर्द हैं जिनको बस सेक्स करना है, चाहे लड़का हो या लड़की।

 

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