चुदाई की कहानी ग्रुप में गे दोस्तों की: 3
सेक्सी गे कहानी: योगेश की मस्ती
हैलो दोस्तो, मैं रतन दत्त। आज योगेश की पूरी गे कहानी आपके सामने रख रहा हूँ। सभी पात्र उन्नीस साल या उससे ऊपर के हैं और हर पल आपसी रजामंदी से चलता है।
मैं योगेश। गाँव में रहता था। माता-पिता खेतों में मजदूरी करते थे। जब मेरी उम्र उन्नीस साल हुई तब सेक्स के बारे में जानने की इच्छा और बढ़ गई।
मेरा एक हमउम्र दोस्त था। हम दोनों एक-दूसरे के साथ हाथ से मजा लिया करते थे। एक दिन मैं ज्वार के खेत के पास से गुजर रहा था तो आवाज सुनाई दी।
मैंने जाकर देखा कि बड़े पौधों के पीछे मेरा दोस्त नंगा लेटा है और गाँव का एक जवान लड़का उसके ऊपर लेटकर कमर हिला रहा है। तीसरा लड़का आसपास खड़ा पहरा दे रहा था। सब उन्नीस-बीस के आसपास थे। मैं चुपचाप लौट आया।
दूसरे दिन मैंने दोस्त से पूछा। उसने मुस्कुराकर बताया कि वह अपनी मर्जी से गांड मरवा रहा था। पहली बार थोड़ा दर्द होता है, बाद में मजा आने लगता है। उसने मुझसे पूछा कि मैं भी आजमाना चाहता हूँ क्या। मैं राजी हो गया।
दोस्त मुझे उसी जगह ले गया। हम दोनों ने कपड़े उतारे। वह मुझसे लिपटा, चूमा, निप्पल सहलाए। मेरा लंड खड़ा हो गया। दोस्त ने अपने लंड पर तेल लगाया, मुझे पेट के बल लिटाया और धीरे-धीरे अंदर डाला। पहले हल्का दर्द हुआ, फिर मजा आने लगा। थोड़ी देर बाद उसने अंदर पानी छोड़ दिया।
उसने पूछा मजा आया? मैंने कहा हाँ, बहुत आया। फिर उसने कहा कल उन दोस्तों को बुलाऊँ जो मेरे साथ खेलते हैं, उनका लंड थोड़ा बड़ा है, तुम्हें और मजा आएगा। मैं सोचकर राजी हो गया।
अगले दिन वही दो जवान लड़के खेत में इंतजार कर रहे थे। सबने कपड़े उतारे। एक ने मुझे चूमा, दूसरे ने दोस्त को। उन्होंने कहा लंड चूसो, मजा आएगा। दोस्त घुटनों के बल बैठ गया। मैंने भी हिम्मत की और चूसने लगा। पहले झिझक हुई, बाद में मजा आने लगा। लंड धीरे-धीरे तन गया, करीब छह इंच का मोटा था।
उसने कहा उल्टा लेट जा, अब और मजा करेंगे। मैं थोड़ा डर गया क्योंकि लंड बड़ा लग रहा था। दोस्त बोला घबरा मत, मैंने कई बार लिया है, मैं तुम्हारी गांड तैयार कर देता हूँ। मैं लेट गया। दोस्त ने उंगलियों में तेल लगाकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। दर्द कम हुआ, मजा बढ़ गया।
फिर बड़े लंड वाले ने तेल लगाया और धीरे से पूरा अंदर डाल दिया। दर्द हुआ तो मैंने कहा धीरे करो। उसने गति कम कर दी। दोस्त पास लेट गया और दूसरा लड़का उसकी गांड मारने लगा। मैं दोस्त को देखकर हिम्मत जुटाया और पैर और फैला दिए। धीरे-धीरे दर्द मजे में बदल गया। थोड़ी देर बाद उसने अंदर पानी भर दिया। वीर्य से जलन कम हो गई।
दो दिन बाद दर्द पूरी तरह ठीक हो गया। गांड फिर कुलबुलाने लगी। मैंने दोस्त से कहा। उसके बाद हम उन लड़कों के साथ खेत जाते और बारी-बारी गांड मरवाते। कुछ और जवान दोस्त भी शामिल हो गए। तीन-चार लड़के एक के बाद एक करते। मैं देर तक मजा लेने का आदी हो गया। अकेले से तृप्ति नहीं होती थी।
गाँव में काम कम था, घर में पैसे की जरूरत थी। उन्नीस-बीस की उम्र में मैं शहर आया और एक छोटे ढाबे में काम करने लगा। कुछ पैसे बचाकर गाँव भेजता। ढाबे में रोज इक्कीस-बाईस साल के दो लड़के खाना खाने आते। पहचान हो गई।
एक दिन उन्होंने पूछा तनख्वाह कितनी है। मैंने चार हजार और खाना बताया। मैं रात को ढाबे में ही सोता था। अगले दिन उन्होंने कहा हमारे फ्लैट में रह सकते हो। चाय, नाश्ता, खाना बनाना, खुद भी खाना, आठ हजार देंगे। मैं राजी हो गया।
फ्लैट दो बेडरूम का था। वे दोनों अपने कमरे में सोते, मैं ड्राइंग रूम में। मेरे खाने की तारीफ करते। अच्छा खाना खाने से बदन भर गया। गाँव के लड़कों की याद आती। जब खुजली ज्यादा होती तो मोमबत्ती से खुद मजा ले लेता।
एक रात जब मैं मजा ले रहा था तो एक लड़का देख रहा था। मैंने चादर ओढ़ ली। दूसरे दिन शाम को दोनों ने कहा तुम घर की देखभाल अच्छी करते हो। रात को हमारी पत्नी बन जाओ, हमारे साथ सोओ। मैंने मतलब समझ लिया, शरमाया और मुस्कुरा दिया।
उन्होंने मांग में सिंदूर लगाया। शराब और चखना निकाला। मैंने पहली बार शराब पी, जल्दी नशा चढ़ गया। उम्र में बड़ा वाला बोला पहले सुहागरात मैं मनाऊँगा। वह मुझे बेडरूम ले गया, चूमा, कपड़े उतारे। मैं पेट के बल लेट गया। उसने कंडोम लगाया और धीरे से अंदर डाला। थोड़ी देर बाद कंडोम में झड़ गया। दूसरे ने भी मारा। उस रात दोनों ने दो-दो बार किया। मैं तृप्त होकर सो गया।
करीब हर रात दोनों मेरी गांड मारते। एक रात हम तीनों ने बीडीएसएम वीडियो देखा। वे बोले करके देखते हैं। मैं राजी हो गया, बस ज्यादा तकलीफ हो तो रुक जाना। मैं पलंग पर हाथ रखकर झुक गया। वे बेल्ट से हल्के-हल्के कूल्हों पर मारने लगे। मुझे मार खाने में भी मजा आने लगा। फिर जोरदार चुदाई हुई। बाद में कई बार बाँधकर भी करते, जिसमें मुझे सुकून मिलता।
लड़कों को कमल-सुमेर के गे क्लब के बारे में पता चला। वे मुझे वहाँ ले गए। कमल से पूछा बिना कंडोम सुरक्षित कैसे करें। कमल ने पिचकारी से साफ करना सिखाया। क्लब में अलग-अलग आसन देखे, हमने सीखे। कमल ने डॉक्टर का पता दिया। तीनों की जाँच और खून टेस्ट के बाद डॉक्टर ने बताया कोई बीमारी नहीं। अब बिना कंडोम करते। गांड में वीर्य भरने का अलग मजा आता। कभी मैं उनका लंड चूसकर वीर्य पी जाता।
चार महीने बाद उनके दो दोस्त रहने आए। उनकी भी जाँच हुई। मैं अब चारों की सांझी पत्नी बन गया। नए लड़के भी हर महीने पैसे देते। बैंक में पैसे जमा होने लगे, घर ज्यादा भेजने लगा।
चारों ने सलाह करके मुझे ब्यूटी पार्लर ले गए। वैक्सिंग करवाई, बदन चिकना हो गया। हर चार महीने बाद वैक्सिंग करानी पड़ती, दर्द होता पर चिकनापन अच्छा लगता। अब चारों मेरी गांड मारते। मैं ड्राइंग रूम में नंगा सोता। रात को किसी की नींद खुले और मूड हो तो मेरे ऊपर चढ़ जाता। शाम को चारों के आने के बाद मैं लड़कियों जैसे कपड़े पहन लेता। रोज दबाने और चूसने से चूचियाँ बड़ी हो गई थीं।
रविवार छुट्टी होती। शनिवार की रात हमारा खेल होता। चारों कुर्सी पर बैठकर शराब पीते, मैं कुत्ते की तरह चलकर सबके पास जाता। बारी-बारी आधा लंड मुँह में लेकर चूसता। वे कहते पूरा गले तक लो। मैं वीर्य पी जाता। शनिवार की रात वीर्य ही मेरा खाना होता।
एक लड़का पलंग पर लेट जाता, मैं उसके लंड पर तेल लगाकर अपनी गांड में लेकर उछलता। फिर दूसरा भी डाल देता। दो लंड एक साथ जाने से दर्द होता, चीख निकलती, उन्हें चीख से मजा आता। बाकी दो चूचियाँ दबाते, निप्पल मरोड़ते, कभी हल्की बेल्ट मारते। चारों दो-दो बार करते। आठ बार चुदने से हालत खराब हो जाती, पर मजा भी खूब आता।
ऐसे दो साल निकल गए। एक शाम उन्होंने बताया प्रोजेक्ट पूरा हो गया, एक महीने बाद अपने शहर लौटेंगे। वे मुझे साथ नहीं ले जा सकते थे, दुख था। मैंने कमल को बताया कि नए साथी चाहिए। कमल ने पच्चीस-छब्बीस साल के तीन युवकों से क्लब में मिलाया। मैं तीन युवकों की सांझी पत्नी बनने को राजी हो गया। एक के फार्म हाउस में रहने चला गया। तीनों शादीशुदा थे। उनके साथ सेक्स लाइफ कैसी रही, वो अगले भाग में लिखूँगा।
आपको कहानी कैसी लगी, जरूर लिखें।