भैया का लंड हुआ मेरा

Naught Gay First time anal pics
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हालांकि उम्र में वो मुझसे आठ-नौ साल बड़े थे। उनकी शादी को तीन साल हो चुके थे और दो संतान भी थीं, लेकिन उनको देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो शादीशुदा हैं। लगभग पांच फुट दस इंच की लंबाई, गोरा रंग, चेहरे पर दमक, गहरे काले रेशमी बाल और सत्तर-पचहत्तर किलो वजन यानी देखने में भरा-भरा जवान शरीर।

छाती उठी हुई और होठों पर ताव दे रही मूंछें। देखने में किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं लगते थे। अक्सर कुर्ता-पजामा ही पहनते थे और पैरों में जूती। छाती चौड़ी करके जब चलते थे तो गजब लगते थे। मैं अक्सर उनके घर भाभी के पास पढ़ने जाता था और इस बहाने उनको देखकर आंखें भी सेंक लिया करता था।

लेकिन वो घर में कभी-कभी ही दिखते थे, इसलिए उनके शरीर के बारे में ज्यादा कुछ जान नहीं पाया कि कपड़े उतारने के बाद कैसे दिखते होंगे। पजामा पहनने की वजह से लंड का भी पता नहीं लगता था कि कितना बड़ा होगा। बस उनकी सेक्सी मूंछों और छाती के बारे में सोच-सोचकर मुठ मार लेता था।

एक बार की बात है जब भाभी दोनों संतानों को लेकर गर्मी की छुट्टियों में मायके गई हुई थीं। मेरा उनके घर जाना हो नहीं पा रहा था। मैं उनको देखने के लिए कई दिन से तड़प रहा था और साथ में यह भी सोच रहा था कि घर में अकेले होने की वजह से उनके लंड में भी कई दिन से माल इकट्ठा हो गया होगा। काश मुझे वो पीने का मौका मिल जाए। लेकिन कोई बहाना नहीं मिल रहा था उनके घर जाने का।

फिर अगले दिन ताई जी और ताऊ जी किसी काम से बाहर जा रहे थे और घर में खाना बनाने वाला कोई नहीं था। सुबह ताई जी घर आकर मम्मी को बोल गईं कि संदीप घर में अकेला है और उसको खाना दे देना। मुझे उम्मीद की एक किरण नजर आई और मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि शायद आज बात बन जाए।

इसलिए मैं सुबह से घर में ही घूमता रहा मम्मी की नजरों के सामने, ताकि जब खाने की बारी आए तो वो किसी और को न भेज दें संदीप के घर। वक्त काटना मुश्किल हो रहा था। बड़ी मुश्किल से दस बजे मम्मी ने खाना बनाना शुरू किया। अब तो मैं रसोई में ही मंडराने लगा। मन ही मन सोच रहा था कि कब खाना बने और मम्मी मुझे आदेश दें।

मन में यही ख्याल चल रहे थे। हाय वो अकेला होगा आज घर में, बिस्तर पर लेटा होगा या टीवी देख रहा होगा। मैं मन ही मन कहानियां बुन रहा था। आखिरकार वो शब्द मेरे कानों में पड़ ही गए जिनके लिए मैं सुबह से प्रार्थना कर रहा था। मम्मी बोलीं, अंश आज तेरी ताई जी कहीं बाहर गई हैं और संदीप घर में अकेला है। उसका खाना डिब्बे में लगा दिया है, जाकर दे आ।

मैं खाने का डिब्बा उठाकर उछलता हुआ गेट से निकल गया और सेकंडों में ही संदीप के घर के गेट पर जा पहुंचा। मैंने कुंडी बजाई तो अंदर से आवाज आई, खुला है आ जाओ। मैं दाखिल हुआ और अंदर की कुंडी लगाकर गैलरी के अंदर जाकर आवाज लगाई, संदीप भैया। उधर से आवाज आई, कौन अंश? हां भैया, आपका खाना लेकर आया हूं। तो वहां क्यों खड़ा है, अंदर आ जा।

जैसी ही बरामदे में कदम रखा, मैं सहम सा गया। संदीप भैया बरामदे में बैठकर नहा रहे थे। उनका पूरा बदन पानी में भीगा हुआ लकड़ी की पटड़ी पर आलथी-पालथी मारकर बैठे हुए थे। दाहिने हाथ में पानी का डोल सिर पर जाता हुआ उनके बगल के बालों को दिखा रहा था। सिर से बह रहा पानी काले रेशमी बालों को माथे पर चिपकाता हुआ उनकी छाती के बालों को भिगोता हुआ नाभि से होकर उनके काले रंग के जॉकी अंडरवियर के मूतने वाले कट के पास बने उभार पर से उछलता हुआ नीचे फर्श पर गिर रहा था।

मेरा मुंह खुला रह गया। कुछ सेकंड तक बुत बनकर उनके अंडरवियर के भीगे उभार को देखता रहा। वो फिर बोले, अंश खड़ा क्यों है तू, बैठ, मैं अभी नहाकर आया। ठीक है भैया, कहकर मैं सामने वाले कमरे में बैठ गया और दरवाजा पूरा खोल दिया ताकि उनके भीगे मर्दाना शरीर को जी भर के देख सकूं।

वो पानी डालकर अपनी छाती के बालों में साबुन लगाकर झागों में हाथ फिराने लगे। उनके निप्पल भूरे रंग के थे जो छाती के भीगे बालों में मस्त लग रहे थे। फिर वो अपनी जांघों पर साबुन लगाकर रगड़ने लगे। जब जांघों पर ऊपर की ओर साबुन मलते हुए हाथ अंडरवियर पर अंडों के ऊपर पहुंचा देता तो मेरे मुंह में आई लार को मैं अंदर गटक जाता और एक लंबी आह छोड़ देता।

पहली बार उनके बदन को नंगा देखा था मैंने और मैं अपने आप पर कंट्रोल खोता जा रहा था। अब वो शरीर पर पानी डालकर साबुन को धोने लगे और मुझे आवाज लगा दी, अंश मेरे बेड पर एक तौलिया रखा होगा जरा वो दे दे मुझे। मैं तपाक से तौलिया कंधे पर डालकर संदीप के सामने जाकर खड़ा हो गया।

अब वो भी खड़े होकर पानी डालने लगे और उनका सारा साबुन धुलने लगा। अब दाएं हाथ में डिब्बा लेकर उन्होंने बाएं हाथ को अंडरवियर में डाला और लंड अंदर ही हाथ में मसलते हुए धोने लगे। अब तो हद हो गई थी। उनके अंडरवियर से गिरते पानी के नीचे मुंह लगाकर पीने को मन कर रहा था और बार-बार मुंह में पानी आ रहा था।

फिर मेरी नजर पास ही फर्श पर रखे साबुन पर गई। हवस में डूबे दिमाग ने काम किया और मैं जान-बूझकर पैर साबुन पर रखते हुए फिसलकर घुटनों के बल उनके पैरों में जा गिरा और उनकी कमर को पकड़ते हुए मुंह सीधा उनके भीगे अंडरवियर में बने उभार पर जा लगा। मैंने होंठ लंड पर लगा दिए और उनके चूतड़ों को हाथों में भींच दिया। आह, क्या जन्नत का अहसास था वो।

एक बार तो उनकी भी ईस्स निकल गई लेकिन फिर वो मुझे हाथों से संभालते हुए बोले, अरे क्या हुआ, तुझे लगी तो नहीं? मैं भी वापस उठता हुआ बोला, नहीं भैया, बस जरा सा पैर फिसल गया था। कहते हुए मैं उठने लगा तो मेरी नजर उनके अंडरवियर के मूतने वाले कट पर पड़ी तो देखा कि मेरे होंठों के अहसास से उनके लंड में हल्का सा तनाव आ गया है और वो सात इंच का लंड गीले अंडरवियर में लटका हुआ है।

भैया बोले, ठीक है, तौलिया मुझे दे दे और बिस्तर पर मेरा अंडरवियर रखा होगा वो भी ला दे जरा। मैं अंडरवियर लेने कमरे में वापस गया। अब मेरी वासना भी चरम पर थी। पलंग पर उनका लाल रंग का जॉकी अंडरवियर था जिस पर हल्के सफेद रंग का चमकीला सा पदार्थ लगा हुआ था। लगता है भाभी के ना होने की वजह से भैया ने अंडरवियर नहीं धोया है।

मैंने अंडरवियर को उल्टा किया और मेरी वासना उस अंडरवियर को मेरे होठों तक ले गई। मूतने वाले कट के पास लगे सफेद सूख चुके पदार्थ को मैंने जीभ से चाट लिया। आह, क्या स्वाद था उसका, हल्का नमकीन और उसमें से आ रही संदीप के लंड की खुशबू। नाक में लगाकर सूंघता रहा और चाटता रहा। भैया ने फिर आवाज लगाई, अरे कहां रह गया? मैं हड़बड़ाकर बोला, आया भैया।

लेकिन यह क्या, अंडरवियर को चाटने से वो अंदर से हल्का गीला हो गया। अंडरवियर लेकर पहुंचा और भैया को दे दिया। भैया ने देखा कि अंडरवियर अंदर से गीला है। अब उनको शायद मेरे गिरने वाले नाटक का पता लग गया और अनजान बनकर बोले, अंश यार ये साबुन का पानी जो फर्श पर फैला है इसे साफ कर दे। मैं झाड़ू और डिब्बा लेकर पानी डालने लगा।

झुका हुआ मैं फर्श पर पानी डालते हुए भैया के लटके गीले लंड को देखे जा रहा था और वो मेरे ऊपर ही नजर बनाए हुए थे। वो छाती के पानी को पोंछते हुए तौलिये को मेरी नजर और उनके लंड के बीच में नहीं आने दे रहे थे। मेरे देखते रहने से उनके लंड में तनाव आना शुरू हो गया। तौलिया कंधे पर डालते हुए उन्होंने अंडरवियर पर हल्का सा खुजला दिया जिससे मेरे होंठ खुल गए और आह निकल गई।

यह देखकर भैया का लंड जैक की तरह ऊपर उठता हुआ पूरा तन गया और अंडरवियर का तंबू सीधा नुकीला होकर मेरी तरफ इशारा करने लगा। भैया ने कहा, देख मेरे पैरों के पास थोड़ा गंदा पानी है इसे भी साफ कर दे। मैं झाड़ू लगाते हुए भैया के और करीब आ गया और लंड मेरे नाक के सामने गीले अंडरवियर में झटके मार रहा था।

मैं और करीब आ गया और मेरे होंठों और लंड के बीच में आधे हाथ से कम दूरी रह गई। अब भैया की उत्तेजना भी बढ़ गई थी और उन्होंने अंगड़ाई लेने के बहाने अपने दोनों हाथ कूल्हों पर रखते हुए गांड को आगे धकेल दिया जिससे लंड मेरे होठों को छू गया। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं वहीं घुटनों पर बैठकर उनके गीले अंडरवियर को मुंह में लेकर बेतहाशा चूसने लगा।

मेरे हाथ भैया की गद्देदार भीगी गांड पर कस गए थे और भैया के हाथ मेरे सिर पर। वो गांड को आगे धकेलते हुए अंडरवियर समेत मेरे मुंह को चोदने लगे। लंड से पानी आना शुरू हो गया और पच्च-पच्च की आवाज होने लगी। अब उन्होंने अंडरवियर नीचे गिरा दिया और अपने सांवले से गीले अंडों में मेरा मुंह दे दिया।

लंड के ऊपर हल्के-हल्के झांट थे जो हफ्ते भर पहले काटने के बाद उगे थे और मैं उनके सात इंच के लौड़े को मस्ती से चूसने लगा। उनकी सिसकारियां निकलने लगीं। वो तेज-तेज मुंह को चोदने लगे और दो मिनट बाद वीर्य की गर्म पिचकारी मेरे गले में लगने लगी। चार मोटी-मोटी पिचकारियों से मेरा मुंह भर गया और मैं उसे भैया का प्यार समझकर पी गया।

फिर तो भैया मेरे सामने नंगे ही खड़े हो गए और मैं उनके सिकुड़ते लंड को देखने लगा। वो बोले, तू पसंद करता है इसे? हां भैया। तो पहले क्यों नहीं किया कभी? आपसे डर लगता था। अरे नहीं मेरी जान, तूने तो तेरी भाभी से ज्यादा मजा दे दिया आज। वो तो कभी नहीं चूसती और चूसती है तो नखरे करती है। अब तो तेरी भाभी की गैरहाजिरी में तुझे ही बुलाया करूंगा। ठीक है भैया, मैं तो आपको वैसे भी बहुत पसंद करता हूं।

यह सुनकर भैया ठहाका मारकर हंस पड़े और बोले, ठीक है अंश, तू जा अब। तेरी पसंद का मैं अब ख्याल रखूंगा। फिर भैया ने मुझे अपने रूम में ले जाकर अपने कच्चे पलंग पर लिटा दिया, जिस पर सिर्फ एक सूती चादर बिछी थी जो उसकी मेहनत के पसीने और अब कामुकता की गर्मी से भीग चुकी थी। संदीप ने अपने लंड पर भरपूर मात्रा में सरसों का तेल लगाया। तेल की गंध कमरे में भर गई।

उसका लंड एकदम खड़ा था, नसें उसमें फूट पड़ी थीं और वो मूसल जैसा मोटा और लंबा लग रहा था। उसने अंश की कमर को पकड़ा और अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर सेट किया। अंश ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वो जानता था कि अब दर्द होगा, लेकिन वो उस पल के लिए तैयार था। संदीप ने एक जोरदार धक्का लगाया। उसका मोटा सुपारा अंश की कसी हुई गांड के छेद को चीरता हुआ अंदर घुसा। अंश के मुंह से एक जोरदार चीख निकल गई, ईईई मां।

संदीप रुका नहीं। उसने अपना पूरा वजन अंश की गांड पर डाल दिया और एक ही झटके में आधा लंड अंदर पेल दिया। अंश की आंखों से पानी आ गया। उसकी गांड जल रही थी जैसे किसी ने उसमें आग लगा दी हो। सरसों का तेल दर्द को थोड़ा कम कर रहा था, लेकिन संदीप के लंड की रफ्तार बर्दाश्त करने वाली नहीं थी। संदीप ने अपनी कमर चलानी शुरू कर दी। धप्प धप्प धप्प। उसके जांघ अंश की गांड से टकरा रहे थे और आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।

ले अपनी गांड मरवा, रांड के जाया, संदीप गालियां दे रहा था। तूने मुझे बहुत तड़पाया है, आज मैं तेरी इस गांड की औकात बताऊंगा। संदीप ने अंश को कुतिया के ढंग में आने को कहा। अंश ने अपनी गांड उठाई और सिर तकिए पर रख दिया। संदीप ने पीछे से उसकी गांड पर फिर से हमला बोल दिया। इस बार वो और गहराई तक जा रहा था। वो अपने लंड को पूरा बाहर निकालता और फिर एक झटके में अंदर घुसा देता।

अंश का पूरा शरीर हिचकोले खा रहा था। दर्द अब धीरे-धीरे एक अजीब सी सुन्नता में बदल रहा था और फिर वो सुन्नता एक मदहोश कर देने वाली खुशी में। संदीप ने अंश को अपनी गोद में उठा लिया। अब अंश हवा में लटका हुआ था और संदीप उसकी गांड को ऊपर-नीचे कर रहा था। यह एक ऐसी पोजीशन थी जिसमें संदीप का पूरा लंड अंश की गांड को चीर रहा था। अंश का लंड भी खड़ा हो गया था और वो हवा में लहरा रहा था।

संदीप ने उसके लंड को पकड़ा और उसे भी हिलाने लगा। दोनों तरफ से मजा मिल रहा था। आह भाई और जोर से, फाड़ दो मेरी गांड, अंश भी अब मजे में आ चुका था और गंदी गालियां देने लगा था। तेरा लंड बहुत मस्त है रे, मेरी गांड को तेरी नसें चुभ रही हैं। संदीप ने उसे बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। उसने अंश के दोनों पैर अपने कंधे पर रख लिए और डीप स्ट्रोक शुरू कर दिए। वो तेजी से धक्के मार रहा था।

अंश की गांड अब बिल्कुल ढीली हो चुकी थी और वो संदीप के हर एक धक्के का जवाब अपनी कमर हिलाकर दे रहा था। संदीप का पसीना अंश के शरीर पर टपक रहा था। दोनों के शरीर चिपक गए थे। संदीप ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। वो झड़ने वाला था। ले मेरा पानी अपनी गांड में ले, आज तेरी गांड को भर दूंगा, वो चिल्ला रहा था। और फिर एक जोरदार धक्के के साथ संदीप ने अपना वीर्य अंश की गांड में उड़ेल दिया।

गर्मागर्म वीर्य अंश की गांड की दीवारों को छू रहा था। अंश भी उसी समय झड़ गया, उसका वीर्य संदीप की छाती पर फैल गया। दोनों सांसें भारी थीं। लेकिन संदीप थका नहीं था। वो अभी भी अंश की गांड में लंड डाले हुए था। उसने अंश को फिर से पलटा दिया और स्पूनिंग पोजीशन में आ गया। वो अंश के कानों में कह रहा था, अभी तो शुरुआत है अंश। तेरी ये गांड आज रात तक याद रखेगी कि संदीप भाई ने उसे कैसे चोदा है।

संदीप ने दूसरी बार चुदाई शुरू कर दी। इस बार वो धीरे-धीरे कर रहा था, लेकिन गहराई से। वो अपने लंड को अंश की गांड में घुमा रहा था। अंश तड़प रहा था। वो चाहता था कि संदीप तेज करे, लेकिन संदीप उसे तड़पा रहा था। वो जानता था कि अंश अब उसका दीवाना हो चुका है। अंश की उम्र बाईस साल है।

 

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